Monday, March 30, 2009

ELECTIONS 2009 (मेरी प्रतिक्रिया ...) 5

आज अडवाणी जी ने एक बार फिर काले पैसे का मुद्दा प्रेस कांफ्रेंस करके उठाया (पहले भी वो प्रधानमंत्री जी को पत्र लिख कर इससे अवगत करा चुके थे ) . इस पर कांग्रेस यह कहकर पल्ला झार गई की ,उन्हें यह बात आज याद आई ? तब तो कांग्रेस के द्वारा उठाये हर मुद्दे पे ऐसा कहा जा सकता है ( आख़िर आज तक तो देश पर उसी ने राज किया !! )जबकी मेरी जानकारी है की हाल के ही समय में विश्वा के दुसरे देश भी इस मामले में जागरूक हुए है. भारत का कुल धन स्विस बैंक में लगभग 1500 अरब डॉलर है जो की अन्य देशों ( चीन 96 , russia, frans )सबसे काफी अधिक है. यदि इसे देश के ६ लाख गावों में बाँट दीया जाए तो हर गावं के हिस्से में लगभग 4 करोड़ रुपया आएगा.
अपने आधे घंटे के संबोधन में वो बिशेष कर इसी मुद्दे पर बोले , लाख नही चाहने के बाद भी एक पत्रकार के प्रश्न के जबाब में उन्हें पीलीभीत मुद्दे पर बोलना पड़ा जिसमे उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता को संयम से बिचार रखने की बात कही. इस चीज को लिखने का मेरा वजह यह है की मैंने न्यूज़ चैनल को दुबारा अडवाणी जी द्वारा उठाये गए मुख्या मुदा ( ब्लैक मनी ) को न के बराबर प्रकाश में लाते पाया , उसके बिपरीत मुश्किल से 1 मिनट बोले गए बरुन गाँधी मुद्दा न्यूज़ चैनल का मुख्य न्यूज़ था.
जब अडवाणी जी ने मनमोहन सिंह को लाइव टी. भी. debate के लिए चैलेन्ज किया तो किसी चैनल ने इसपर कोई खास टिपण्णी नही की . कांग्रेस प्रवक्ता ने यह कहकर बात ताल दी की हमारे यहाँ लोकतंत्र में ऐसे किसी debate का प्रावधान नही है. मेरा प्रश्न है -
क्या यह ग़लत था ?
क्या मनमोहन सिंह जी इसमे सक्षम नही थे ?
मेरे समझ से यह आने वाले कल की महत्वपूर्ण कड़ी साबित होता……।

कमल खिलेगा -देश खिलेगा ..

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