अपने आधे घंटे के संबोधन में वो बिशेष कर इसी मुद्दे पर बोले , लाख नही चाहने के बाद भी एक पत्रकार के प्रश्न के जबाब में उन्हें पीलीभीत मुद्दे पर बोलना पड़ा जिसमे उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता को संयम से बिचार रखने की बात कही. इस चीज को लिखने का मेरा वजह यह है की मैंने न्यूज़ चैनल को दुबारा अडवाणी जी द्वारा उठाये गए मुख्या मुदा ( ब्लैक मनी ) को न के बराबर प्रकाश में लाते पाया , उसके बिपरीत मुश्किल से 1 मिनट बोले गए बरुन गाँधी मुद्दा न्यूज़ चैनल का मुख्य न्यूज़ था.
जब अडवाणी जी ने मनमोहन सिंह को लाइव टी. भी. debate के लिए चैलेन्ज किया तो किसी चैनल ने इसपर कोई खास टिपण्णी नही की . कांग्रेस प्रवक्ता ने यह कहकर बात ताल दी की हमारे यहाँ लोकतंत्र में ऐसे किसी debate का प्रावधान नही है. मेरा प्रश्न है -
क्या यह ग़लत था ?
क्या मनमोहन सिंह जी इसमे सक्षम नही थे ?
मेरे समझ से यह आने वाले कल की महत्वपूर्ण कड़ी साबित होता……।
कमल खिलेगा -देश खिलेगा ..
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