आँखें खुली है ,अपलक देखता हूँ
कोई देखे तो सोचे
कही नज़र टिकी हुई है,
लेकिन अफ़सोस मुझे कुछ दिखता ही नही
ध्यान केंद्रित है -
एक साथ बहुत कुछ सोचता हूँ लेकिन
किसी सोच को अंजाम दे पता नही
कारण किसी एक चीज पर ज्यादा सोचने का जी करता नही !!!!
arvind
( THIS IS THE REASON ,INSPITE OF HAVING DEEP INTERSEST\LOVE WITH HINDI MY MANY POEMS ARE STILL EXISTING IN DIARY ONLY..
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1 comment:
लेकिन सोचना तो पड़ेगा गुरू क्योंकि बिना सोचे तो कुछ होता नहीं है.
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