Saturday, March 29, 2008

ख़ुद से संघर्ष !!!!

आँखें खुली है ,
अपलक देखता हूँ
कोई देखे तो सोचे
कही नज़र टिकी हुई है,
लेकिन अफ़सोस मुझे कुछ दिखता ही नही

ध्यान केंद्रित है -
एक साथ बहुत कुछ सोचता हूँ लेकिन
किसी सोच को अंजाम दे पता नही
कारण किसी एक चीज पर ज्यादा सोचने का जी करता नही !!!!
arvind

( THIS IS THE REASON ,INSPITE OF HAVING DEEP INTERSEST\LOVE WITH HINDI MY MANY POEMS ARE STILL EXISTING IN DIARY ONLY..

1 comment:

सौरभ शुक्ल said...

लेकिन सोचना तो पड़ेगा गुरू क्योंकि बिना सोचे तो कुछ होता नहीं है.